समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2019 में गुजरात शीर्ष पर है

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जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों में वृद्धि करने के लिये, नीति आयोग ने संयुक्‍त जल प्रबंधन सूचकांक (Composite Water Management Index -CWMI 2.0) का दूसरा संस्करण तैयार किया है। 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 13 ने पिछले साल की तुलना में अपने जल प्रबंधन में सुधार किया है। इसमें भूजल, जल निकायों की पुनर्स्थापना, सिंचाई, खेती के तरीके, पेयजल, नीति और प्रबंधन (बॉक्स-1) के विभिन्न पहलुओं के 28 विभिन्न संकेतकों के साथ 9 विस्तृत क्षेत्र शामिल हैं। समीक्षा के उद्देश्य से राज्यों को दो विशेष समूहों- ‘पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्य’ और ‘अन्य राज्य’ में बांटा गया।


आज जारी रिपोर्ट में गुजरात को वर्ष 2016-17 के लिए प्रथम श्रेणी में रखा गया, इसके बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र का नंबर आता है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में वर्ष 2016-17 के लिए त्रिपुरा को प्रथम श्रेणी दी गई, इसके बाद हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, और असम का स्थान रहा। सूचकांक में वृद्धि संबंधी बदलाव के संदर्भ में (2015-16 स्तर) सभी राज्यों में राजस्थान को प्रथम श्रेणी में रखा गया जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा प्रथम स्थान पर रहा। नीति आयोग ने भविष्य में इसे सालाना स्तर पर प्रकाशित करने का प्रस्ताव किया है।


प्रमुख बिंदु


  • CWMI 2.0 ने आधार वर्ष 2016-17 के संदर्भ में वर्ष 2017-18 के लिये विभिन्‍न राज्‍यों को स्‍थान प्रदान किया है। रिपोर्ट में गुजरात ने वर्ष 2017-18 में 100 में से 75 अंक प्राप्त कर पहला स्‍थान प्राप्त किया है, इसके बाद आंध्र प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु का स्‍थान है।
  • पूर्वोत्‍तर और हिमालयी राज्‍यों में हिमाचल प्रदेश प्रथम स्‍थान पर रहा। इसके बाद उत्‍तराखंड, त्रिपुरा और असम का स्‍थान है।
  • संघशासित प्रदेशों ने पहली बार अपने आँकड़े दिये हैं, जिनमें पुद्दुचेरी शीर्ष स्‍थान पर रहा है।
  • सूचकांक में वृद्धि संबंधी बदलाव के मामले में हरियाणा सामान्‍य राज्‍यों में पहले स्‍थान पर और पूर्वोत्‍तर तथा हिमालयी राज्‍यों में उत्‍तराखंड पहले स्‍थान पर रहा है।
  • औसतन 80 प्रतिशत राज्‍यों ने पिछले तीन वर्षों में सूचकांक का आकलन किया और अपने जल प्रबंधन स्‍कोर में सुधार किया, जिसमें औसत सुधार +5.2 प्‍वाइंट रहा।


समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (CWMI) के बारे में


 नीति आयोग द्वारा जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन में प्रदर्शन का आकलन और सुधार करने के लिए समग्र जल प्रबंधन सूचकांक को उपयोगी उपकरण के रूप में लॉन्च किया गया था. इसका उद्देश्य जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उपयुक्त रणनीतियों को तैयार करना और लागू करना है. संयुक्त जल प्रबंधन सूचकांक में 9 पैरामीटर और 28 संकेतक शामिल हैं. इनमें भूजल, सिंचाई, जल निकायों की मरम्मत, कृषि प्रथाओं, पेयजल, नीति और शासन के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है. विश्लेषण के उद्देश्य से सूचकांक में राज्यों को उत्तर पूर्वी व हिमालयी राज्यों और अन्य राज्यों के दो विशेष समूहों में विभाजित किया गया था. 

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