कैबिनेट ने भारत-चिली के बीच दोहरे कराधान से बचाव समझौते को मंजूरी दी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत गणराज्य और चिली गणराज्य के बीच दोहरे कराधान से बचाव समझौते (DTAA) और प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है। इससे दोहरे कराधान को खत्म करने के साथ-साथ राजकोषीय चोरी रोकने और आय पर करों के संबंध में परहेज में मदद मिलेगी।


डीटीएए समझौते और प्रोटोकॉल का प्रमुख प्रभाव


यह दो राष्ट्रों के बीच दोहरे कराधान को समाप्त करने की सुविधा प्रदान करेगा। इसके अलावा, अनुबंध द्वारा राज्यों के बीच कर अधिकारों का एक स्पष्ट आवंटन दोनों देशों के निवेशकों और व्यवसायों को कर निश्चितता प्रदान करेगा। यह तकनीकी सेवाओं, रॉयल्टी के लिए शुल्क तय करने और ब्याज पर स्रोत राज्य में कर दरों के माध्यम से निवेश के प्रवाह को भी बढ़ाएगा।


समझौता और प्रोटोकॉल G-20 OECD बेस कटाव लाभ स्थानांतरण (BEPS) परियोजना (या BEPS प्रोजेक्ट) के न्यूनतम मानकों और अन्य सिफारिशों को लागू करता है। समझौते में बीईपीएस परियोजना के अनुसार एक प्रधान उद्देश्य परीक्षण, प्रस्तावना पाठ, एक सामान्य विरोधी दुरुपयोग प्रावधान के साथ-साथ लाभ सीमा (SLBC) के एक सरलीकृत सीमा के प्रावधान शामिल हैं। इससे कर नियोजन रणनीतियों पर अंकुश लगेगा जो कर नियमों में अंतराल और बेमेल शोषण करते हैं।


आगे का रास्ता


कार्यान्वयन की रणनीति और लक्ष्य में मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद समझौते और प्रोटोकॉल को लागू करने के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करना शामिल है। कार्यान्वयन को केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा देखा और रिपोर्ट किया जाएगा।

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