Conservative laws

Conservative laws संरक्षण के नियम


जब कोई भौतिक राशि (Physical Quantity) बदलती नहीं है तो हम उस से संरक्षित (Conservative) मानते हैं। अगर हमारे पास किसी समय संरक्षित राशि (conservative quantity) की एक निश्चित मात्रा है और समय बीतने के साथ उस राशि की मात्रा उतनी ही रहती है तो हम उसे संरक्षित कहते हैं। इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि राशि ने अपने आपको समय के साथ बदला नहीं। परंतु हम देखेंगे कि राशि की बदली गई अवस्थाओं में उसकी कुल मात्रा बराबर रहती है।


उदाहरण के लिए:- कल्पना कीजिए कि एक लाइट बल्ब फर्श पर गिर जाता है और छोटे छोटे टुकड़ों में बिखर जाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके टुकड़े कितने छोटे हैं अगर हम सारे टुकड़ों को एक साथ इकट्ठा करें तो हम देखेंगे कि सारे टुकड़ों का mass साबुत बल्ब के mass के बराबर ही होगा। यह दर्शाता है कि बल्ब का कुल मास्स संरक्षित (conservative) है।


शास्त्रीय भौतिकी में, सामान्यतः हम निम्नलिखित संरक्षण के नियमों को पढ़ते या देखते हैं।

  1. रेखीय संवेग का संरक्षण का नियम (law of conservation of linear momentum)

  2. ऊर्जा के संरक्षण का नियम (law of conservation of energy_

  3. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम (law of conservation of angular momentum)

  4. आवेशों के संरक्षण का नियम (law of conservation of charges)


चलिए इन नियमों को ब्रीफ में डिस्कस करते हैं।


1. law of conservation of linear momentum रेखीय संवेग का संरक्षण का नियम

इस नियम के मुताबिक "in the absence of any external force the linear momentum of a system remains unchanged."

अर्थात किसी बाहरी बल की अनुपस्थिति में निकाय का रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।

इस नियम का मतलब है कि यदि हमें किसी निकाय का रेखीय संवेग परिवर्तित करना है तो हमें उस पर एक बाहरी बल आरोपित करना होगा।



उदाहरण के लिए:-

जब किसी बंदूक से एक गोली दागी जाती है तो गोली पर बंदूक के बैरल के अंदर जितना बल होगा वह बंदूक पर लगने वाले बल के बराबर तथा विपरीत होगा। गोली चलाने से पहले पूरा निकाय विराम rest मैं होता है तो उसका कुल रेखीय संवेग शून्ये होगा। गोली दागने के बाद भी कुल रेखीय संवेग शून्ये ही होगा क्योंकि गोली दागने पर गोली द्वारा प्राप्त किया गया रेखीय संवेग आगे की दिशा में होगा तथा बंदूक द्वारा प्राप्त किया रेखीय संवेग गोली द्वारा प्राप्त किए रेखीय संवेग के बराबर तथा विपरीत दिशा यानी कि पीछे की तरफ होगा तो दोनों को साथ मैं जोड़ने पर निकाय का कुल रेखीय संवेग शून्य ही होगा।

2. law of conservation of energy ऊर्जा के संरक्षण का नियम


इस नियम के मुताबिक "energy cannot be created or destroyed it can be transformed from one form into another but the total amount of energy never change."

यानी कि ऊर्जा ना तो बनाई जा सकती है और नाही खत्म की जा सकती है बस इसे एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है तथा ऊर्जा की कुल मात्रा समान रहती है वह बदलती नहीं है।



उदाहरण के लिए:-

परमाणु संयंत्रों (nuclear reactor) में परमाणु उर्जा न्यूक्लियर एनर्जी को ऊष्मीय ऊर्जा हीट एनर्जी में परिवर्तित किया जाता है फिर उसमें ऊर्जा से गतिज ऊर्जा काइनेटिक एनर्जी तथा गतिज ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा इलेक्ट्रिक एनर्जी उत्पन्न की जाती है।








3. Law of conservation of angular momentum रेखीय संवेग के संरक्षण का नियम।



इस नियम के मुताबिक "If the total external torque acting on a system is zero angular momentum of the system remain constant."

यानी कि यदि किसी निकाय पर लगने वाला बाहरी बल आघूर्ण अगर जीरो हो तो निकाय का रेखीय संवेग नियत रहता है।



4. law of conservation of charge आवेशों के संरक्षण का नियम।


इस नियम के मुताबिक " Charge nighter be created or nore be destroy it can be transform from one body to another body."


उदाहरण के लिए:-

कोई भी तत्व matter परमाणुओं atoms से बना है तथा परमाणु (atoms) इलेक्ट्रॉन (electron) ,प्रोटॉन (proton) और न्यूट्रॉन (nutron) से बने हैं । हम जानते हैं कि इलेक्ट्रॉनों पर ऋण आवेश (negative charge) तथा प्रोटोन ऊपर धन आवेश (positive charge) होता है। किसी भी परमाणु के अंदर इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटोन ओं की संख्या बराबर होती है जिस कारण जिस कारण परमाणु पर कुल आवेश चुने होता है। पर अगर इनकी संख्या में परिवर्तन आ जाए तो वस्तु आवेशित (charged) हो जाती है। अगर किसी वस्तु पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्यादा हो जाए तो वह ऋण आवेशित (negatively charged) हो जाती है। और यदि किसी वस्तु पर वोटरों की संख्या ज्यादा हो जाए तो वस्तु धन आवेशित positively charged हो जाती है।

यहां पर हम ना तो किसी तरह के आवेश को उत्पन्न कर रहे हैं और ना ही खत्म बस आवेशों की संख्या परिवर्तित हो जाने के कारण वस्तु पर अलग-अलग तरह के आवेश आ जाते हैं।

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